माइकल न्यूटन: एक जीवन परिचय
माइकल न्यूटन (1931-2016) एगो अमेरिकी हाइप्नोथेरेपिस्ट रहलें जिनकर काम आत्मा के बारे में हमार समझ के बिल्कुल नया आयाम दिहलस। ऊ मूल रूप से पारंपरिक चिकित्सा करत रहलें, मगर एकरा बाद ऊ गहिरा हाइप्नोसिस के जरिये पिछिला जनम के याद दिलावे के तकनीक (पास्ट लाइफ रिग्रेशन) पर काम करे लगलें। ओकर अनुभव में ई बात सामने आइल कि जब लोग अपना पिछिला जनम के याद करे ला, त ओह लोग के आत्मा के दो जनम के बीच के समय (इंटर-लाइफ पीरियड) के बारे में भी बतावे ला। ईही से michael newton life between lives के खोज के सुरुआत भइल।
लाइफ बिटवीन लाइव्स (एलबीएल) रिग्रेशन के खोज
न्यूटन अपना क्लिनिकल प्रैक्टिस में हजारों गो मरीज के गहिरा हाइप्नोसिस में ले जाइक के बाद एगो सुसंगत तस्वीर देखलें। ओकरा पता चलल कि मौत के बाद, आत्मा एगो ऊर्जा के रूप में एगो आध्यात्मिक दुनिया में वापस जाला, जेकरा बारे में ऊ अपना पुस्तक “जर्नी ऑफ सोल्स” में विस्तार से बतवले बाड़ें। ई दुनिया हमार भौतिक दुनिया से अलग बा, जहाँ आत्मा सीखे, आराम करे आ अगिला जनम के तैयारी करे ला। ईही प्रक्रिया के न्यूटन लाइफ बिटवीन लाइव्स थेरेपी कहलें। ओकर शोध से ई बात पुष्टि भइल कि michael newton life between lives के अवधारणा केवल कल्पना ना हवे, बलुक एगो सुसंगत आध्यात्मिक अनुभव हवे।
न्यूटन के प्रमुख पुस्तक आ शोध
न्यूटन के पहिली पुस्तक, “जर्नी ऑफ सोल्स” (1994), एगो बिस्फोटक प्रभाव छोड़लस। इसमें ऊ अपना मरीज सभ के हाइप्नोसिस के दौरान दिहल गइल विवरण के आधार पर आत्मा के यात्रा के बर्णन कइलें। ई पुस्तक बहुत लोकप्रिय भइल आ दुनिया भर के लोग के आकर्षित कइलस। इहोए बाद, ऊ अपना दूसर पुस्तक “डेस्टिनी ऑफ सोल्स” (2000) में आत्मा के विकास, ओकर मकसद आ जीवन के पाठ के बारे में गहिराई से लिखलें। ई दुनों पुस्तक michael newton life between lives के दर्शन के मुख्य आधार बन गइल।
आत्मा के दुनिया के संरचना
न्यूटन के शोध से आत्मिक
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